मूर्ख कछुआ की कहानी – Hindi Story, Moral Story in Hindi, Short Story

यह एक मूर्ख कछुआ की कहानी है. मूर्ख कछुआ की कहानी में जब कछुआ पानी की तलाश में एक जगह से किसी दूसरे जगह जा रहा होता है तभी वह कुछ ऐसी गलती कर देता है कि उसकी मौत हो जाती है. आइये पढ़ते हैं कि आखिर उसने ऐसी क्या मूर्खता की.

बहुत समय पहले की बात है । एक कछुआ था, जो किसी गांव में एक तालाब में रहता था। उसकी मित्रता दो बगुलों से थी। तीनों दोस्त | एक साथ खूब मज़ा किया करते थे। एक बार उनके गांव में बारिश नहीं हुई, जिस कारण वहां भयंकर सूखा पड़ा। नदी व तालाब सूखने लगे, खेत मुरझा गये।

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आदमी व पशु-पक्षी सब प्यास से मरने लगे। वह सब अपनी जान बचाने के लिये गावं छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाने लगे। दोनों बगुलों ने भी अन्य पक्षियों के साथ दूसरे जगह जाने का फैसला लिया। जाने से पूर्व वह अपने मित्र कछुए से मिलने गये। उनके जाने की बात सुनकर कछुए ने उनसे उसे भी अपने साथ ले चलने के लिए कहा।

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इस पर बगुलों ने कहा कि वह भी उसे वहां छोड़कर नहीं जाना चहाते, परन्तु मुशकिल यह है कि कछुआ उड़ नहीं सकता और वह उड़ कर कहीं भी जा सकते है। उनकी बात सुनकर कछुआ बोला, कि यह सच है कि वह उड़ नहीं सकता। परन्तु उसके पास इस समस्या का हल है। कछुए की बात सुनकर बगुलों ने उससे तरीका पूछा।

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कछुआ बोला, “ तुम एक मज़बूत डंडी ले आओ। उस डंडी के दोनो छोरों को तुम दोनों अपनी-अपनी चोंच से पकड़ लेना और मैं उस डंडी को बीच में से अपने मुंह से पकड़कर लटक जाऊंगा। इस प्रकार मैं भी तुम्हारे साथ जा सकूँगा और हम अपनी जान बचा सकेंगे।”

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बगुलों को कछुए की बात पसंद आ गई और वह वहां से चलने की तैयारी करने लगे। चलने से पहले बगुलों ने कछुए को सावधान किया कि वह उसे साथ ले तो जा रहे है परन्तु हमारी एक शर्त कि तुम सारे रास्ते अपना मुहं नहीं खोलोगे। क्योंकि कछुए को बहुत बात करने की आदत थी। उसके लिये चुप रहना बहुत मुशकिल कार्य था।

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बगुले कछुए से आगे बोले, “ यदि तुमने गलती से भी मुँह खोला तो तुम नीचे गिरकर मर जाओगे।” इस पर कछुआ बोला, कि “ मैं कभी भी ऐसी मूर्खता नहीं करूंगा।” दोनों बगुलों ने डंडी के दोनों छोरों को अपनी-अपनी चोंच में दबा लिया। और डंडी के बीच वाले हिस्से को कछुआ अपने मुंह से पकड़ कर लटक गया और बगुले उसे लेकर उड़ने लगे।

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वह तीनों आकाश में ऊंचे उड़ते गये। काफी समय तक उड़ने के बाद वह एक नगर के ऊपर से निकल रहे थे तो उनको देखने के लिये सड़को पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। किसी ने भी ऐसा नज़ारा पहले कभी नही देखा था। वह लोग जोर-जोर से ताली बजाने और शोर मचाने लगे।

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लोगों को इस तरह से शोर मचाते व ताली बजाते देख कछुए को बहुत क्रोध आया। उससे बिना बोले नहीं रहा गया। वह बगुलों द्धारा चुप रहने की बात भूल गया और जैसे ही कछुए ने बोलने के लिये मुंह खोला, वह धड़ाम से नीचे जा गिरा और मर गया।

मूर्ख कछुआ की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हर काम करते समय धैर्य बनाये हुए रखना चाहिए. अगर कछुआ भी धैर्य बनाये हुए रहता तो शायद वह बच सकता था. आपको मूर्ख कछुआ की कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं. इस कहानी को अपने प्रियजनों के साथ भी शेयर करे.

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