सच्ची दोस्ती – Sachchi Dosti, Hindi Story, Hindi Kahani

यह दो दोस्त के सच्ची दोस्ती की कहानी है. सच्ची दोस्ती में एक दोस्त दूसरे दोस्त के लिए अपनी जान देने को भी तैयार रहता है. दोस्ती क्या होती है. इस कहानी में यह बहुत अच्छे ढ़ंग से बताया गया है. तो आईये पढ़ते हैं दो दोस्त की सच्ची दोस्ती की कहानी.

दो मित्र थे। वे दोनों बड़े ही बहादुर थे। उनमें से एक ने अपने बादशाह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। बादशाह बड़ा ही कठोर और निर्दयी था। उसको जब मालूम हुआ तो उसने उस नौजवान को फांसी के फंदे पर लटका देने की आज्ञा दी.

Also Read – Moral Stories in Hindi – दो घड़े की कहानी

नौजवान ने बादशाह से कहा-“आप जो कर रहे हैं वह ठीक है। मैं खुशी-खुशी मौत की गोद में चला जाऊंगा, लेकिन आप मुझे थोड़ी मोहलत दे दीजिए, जिससे मैं गांव जाकर अपने बच्चों से एक बार मिल आऊ. बादशाह ने उससे कहा कि मुझे तुम पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है।

Also Read – बुरी आत्मा की कहानी – लोक कथा | Buri Aatma ki Kahani | Hindi Story, Hindi Kahani, Lok Katha

उस नौजवान का दोस्त वहां मौजूद था। वह आगे बढ़कर आया और बोला—”मैं अपने इस दोस्त की जमानत देता हूं, अगर यह लौटकर न आए तो आप उसके बदले मुझे फांसी पर चढ़वा दीजिएगा।” बादशाह चकित रह गया। उसने अब तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखा था, जो दूसरों के लिए अपनी जान देने को तैयार हो जाए।

Also Read – प्यार की शक्ति – Pyar ki Shakti, Hindi Kahani, Hindi Story

बादशाह ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसे छ: घण्टे का समय दिया गया। वह नौजवान घोड़े पर सवार होकर अपने गांव की ओर रवाना हो गया। उसका मित्र जेलखाने भेज दिया गया। नौजवान ने हिसाब लगाकर देखा कि वह पांच घण्टे में वापस लौट आएगा, लेकिन बच्चों से मिलकर जब वह वापस आ रहा था, तभी उसका घोड़ा ठोकर खाकर गिर गया और फिर उठा ही नहीं।

Also Read – मक्खी का लालच कहानी – Makkhi ka lalach Kahani, Hindi Story, Short Story.

नौजवान को भी चोट आई, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। छः घण्टे बीत गये पर, वह नौजवान नहीं लौटा. तो उसका दोस्त बहुत खुश हुआ। आखिर इससे बढ़कर और क्या बात होती कि एक दोस्त दूसरे दोस्त के काम आए। वह भगवान से प्रार्थना करने लगा कि उसका मित्र न लौटे।

Also Read – बोलती गुफा की कहानी – Bolti Gufa ki Kahani, Hindi Kahani, Hindi Story

जिस समय मित्र को फांसी के तख्ते के पास ले जाया जा रहा था कि नौजवान वहां पहुंच गया।उसने अपने दोस्त से कहा-“मित्र मैं आ गया। अब तुम घर जाओ। मुझे विदा करो।” इसपर उसका दोस्त बोला-“यह नहीं हो सकता। तुम्हारी मियाद पूरी हो गई। नौजवान ने कहा- यह तुम क्या कहते हो! सजा तो मुझे मिली है।”

दोनो मित्रों की दोस्ती को बादशाह बड़े ध्यान से देख रहा था। उसकी आंखें डबडबा आई। उसने उन दोनों को बुलाकर कहा–’तुम्हारी दोस्ती ने मेरे दिल पर बहुत गहरा असर डाला है। जाओ, मैं तुम्हें माफ करता हूं।” उस दिन के बाद उस बादशाह ने कभी किसी पर जुल्म नहीं किया। आपको ये सच्ची दोस्ती की कहानी कैसी लगी. हमें कमेंट करके जरूर बताएं. इसे अपने प्रियजनों के साथ भी शेयर करें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *