Hindi Story – चालाकी का फल, Chalaki ka Phal, Hindi Kahani

यह Hindi Story एक बुढिया और चालाक बिल्ली की है. बुढिया अपनी मुर्गियों की देखभाल के लिए एक बिल्ली को काम पर रखती है. लेकिन वह बिल्ली काफी चालाकी से उसकी मुर्गियाँ चट करती रही. फिर उस बिल्ली का क्या हुआ. इस Hindi Story में हम यही जानेंगे.

एक बुढिया थी, वह बहुत बूढ़ी थी पूरे नब्बे साल की। उस बेचारी को ठीक से दिखाई भी नहीं पड़ता था. उसकी मुर्गियाँ चराने वाली लड़की काम छोड़ कर भाग गयी थी। बुढिया जब सुबह मुर्गियों को चराने के लिये खोलती तो वे बुढिया के घर की चारदीवारी फाँद कर अड़ोस पड़ोस के घरों में भाग जातीं और सारे मोहल्ले में शोर मचाती हुई घूमतीं।

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कभी मुर्गियाँ पड़ोसियों की सब्जी खा जातीं. तो कभी पड़ोसी काट कर उन्हीं की सब्जी बना डालते। दोनों ही हालतों में नुकसान उस बेचारी बुढिया का होता। जिसकी सब्जी बरबाद होती वह बुढिया को बहुत भला बुरा कहता और जो उसकी मुर्गी पकाती, उससे बुढिया की हमेशा की दुश्मनी हो जाती।

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हार कर बुढिया ने सोचा कि बिना नौकर के मुर्गियाँ पालना उसकी जैसी कमजोर बुढिया के बस की बात नहीं। अब उसे एक नोकर रखने की जरूरत है. भला वो कहाँ तक डंडा लेकर एक एक मुर्गी हाँकती फिरे? जरा सा काम करने में ही बुढिया का दम फूल जाता था। फिर बुढिया निकल पड़ी एक नौकर की खोज में.

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बुढिया को थोड़ी ही दूर पर एक सियार मिला और बोला, राम राम बुढिया नानी किसे खोज रही हो इतने अकेले? बुढिया खिसिया कर बोली, अरे खोज रहीं हूँ एक अच्छी सी नौकरानी जो मेरी मुर्गियों की देखभाल कर सके। यह सुन कर सियार बोला, मेरे साथ चलो अभी मैं तुम्हें एक लड़की से मिलवाता हूँ। वह मेरे पड़ोस में ही रहती है। सियार भाग कर गया और अपने पड़ोस में रहने वाली चालाक पूसी बिल्ली को साथ लेकर आ गया।

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पूसी बिल्ली बुढिया को देखते ही बोली, बुढिया नानी नमस्ते । मैं कैसी रहूँगी तुम्हारी नौकरानी के काम के लिये? नौकरानी के लिये लड़की की जगह बिल्ली को देखकर बुढिया चौंक गयी। उसे बहुत गुस्सा आया. बुढिया बिगड़ कर बोली, तुम्हें तो अपना काम भी सलीके से करना नहीं आता होगा। तुम मेरा काम क्या करोगी?

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लेकिन पूसी बिल्ली बड़ी चालाक थी। उसने अपनी आवाज को मीठी बना कर मुस्कुरा कर बोली, अरे बुढिया नानी तुम तो बेकार में ही परेशान हो रही हो। आखिर मुर्गियों की ही तो देखभाल करनी है? वो मैं खूब अच्छी तरह कर लेती हूँ। एक तो पूसी बिल्ली बड़ी अच्छी तरह बात कर रही थी. उपर से बुढिया काफी थक भी गयी थी. इसलिये उसने ज्यादा बहस नहीं की और पूसी बिल्ली को काम पर रख लिया ।

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पूसी बिल्ली ने पहले दिन मुर्गियों को घर में से निकाला और खूब भाग दौड़ कर पड़ोस में जाने से रोका । बुढिया पूसी बिल्ली की इस भाग-दौड़ से संतुष्ट होकर घर के भीतर आराम करने चली गयी। कई दिनों से दौड़ते भागते बुढिया काफी थक गयी थी तो उसे नींद भी आ गयी।

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इधर पूसी बिल्ली ने मौका देखकर पहले ही दिन 6 मुर्गियों को मारा और चट कर गयी। बुढिया जब शाम को जागी तो उसे पूसी की इस हरकत का कुछ भी पता न लगा। एक तो उसे ठीक से दिखाई भी नहीं देता था. दूसरी उसे सौ तक गिनती भी नहीं आती थी। फिर भला वह इतनी चालाक पूसी बिल्ली की शरारत कैसे जान पाती?

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वह अपनी मीठी मीठी बातों से बुढिया को खुश रखती और आराम से मुर्गियाँ चट करती जाती। पड़ोसियों से अब बुढिया की लड़ाई नहीं होती थी. क्योंकि मुर्गियाँ अब उनके खेत में घुस कर सब्जियां नहीं खाती थीं। बुढिया को पूसी बिल्ली पर इतना विश्वास हो गया कि उसने मुर्गियों के घर की तरफ जाना छोड़ दिया।

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धीरे धीरे एक दिन ऐसा आया जब उस घर में बीस पच्चीस मुर्गियाँ ही बचीं। उसी समय बुढिया भी टहलती हुई उधर ही आ निकली। इतनी कम मुर्गियाँ देखकर उसने पूसी बिल्ली से पूछा, क्यों री पूसी, बाकी मुर्गियों को तूने चरने के लिये कहाँ भेज दिया?

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पूसी बिल्ली ने झट से बात बनाई और बोली, अरे और कहाँ भेजूंगी बुढिया नानी। सब पहाड़ के ऊपर चली गयी हैं। मैंने बहुत बुलाया लेकिन वे इतनी शरारती हैं कि वापस आना ही नहीं चाहती। ओफ् ! ये शरारती मुर्गियाँ । बुढिया का बड़बड़ाना फिर शुरू हो गया, अभी जाकर देखती हूँ कि ये इतनी ढीठ कैसे हो गयी हैं? कि पहाड़ के ऊपर खुले में घूम रही हैं। कहीं कोई शेर या भेड़िया आ ले गया तो बस घूमती रह जाएगी.

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ऊपर पहुँच कर बुढिया को मुर्गियाँ तो नहीं मिलीं।लेकिन उनकी हड्डियाँ और पंखों का ढ़ेर जरूर मिल गया. अब बुढिया को समझते देर न लगी कि यह सारी करतूत उस पूसी बिल्ली की ही है। वो तेजी से नीचे घर की ओर लौटी। इधर पूसी बिल्ली ने सोचा कि बुढिया तो पहाड़ पर गयी हैं. अब वहाँ सिर पकड़ कर रोएगी जल्दी आएगी नहीं। तब तक क्यों न मैं बची-बचाई मुर्गियाँ भी खा लूँ? यह सोच कर उसने बाकी मुर्गियों को भी मार डाला।

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अभी वह बैठी उन्हें खा ही रही थी कि बुढिया वापस लौट आई। बुढिया पूसी बिल्ली को मुर्गियाँ खाते देखकर गुस्से से आग बबूला हो गयी. उसने वहीं पास में पड़ी कोयलों की टोकरी उठा कर पूसी के सिर पर दे मारी। पूसी बिल्ली को चोट तो लगी ही, उसका चमकीला सफेद रंग भी काला हो गया। अपनी बदसूरती को देखकर बिल्ली रोने लगी।

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आज भी लोग इस घटना को नही भूले हैं और रोती हुई काली बिल्ली को डंडा लेकर भगाते हैं। इस Hindi Story से हमें यह सीख मिलती है कि चालाकी का उपयोग बुरे कामों में करने वालों को पूसी बिल्ली जैसा ही फल भुगतना पड़ता है। यह Hindi Story पसंदआयी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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